Salient Points of Speech : BJP National President Shri Amit Shah Addressing Shri Vimalamba Pratishtha Mahotsav, Govardhan Math, Sankaracharya Peeth, Puri (Odisha)

Friday, 20 January 2017


भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह द्वारा पुरी (उड़ीसा) में विमलांबा प्रतिष्ठा महोत्सव में दिए गए उद्बोधन के मुख्य बिंदु


जिस तरह से महाप्रभु जगन्नाथ का मंदिर सबको शांति देता है, इसी तरह से माँ विमला का यह भव्य मंदिर सदियों तक श्रद्धालुओं को उनकी आत्मा की उन्नति के लिए प्रेरित करती रहेगी: अमित शाह
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देश की आध्यात्मिक उंचाई को एक इंच भी कम किये बगैर हम भारत को विश्व का सबसे समृद्ध देश बनाना चाहते हैं, यही प्रयास भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्त्व में केंद्र की भाजपा सरकार का है: अमित शाह
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भगवान् आदिशंकर ने अपने भारत भ्रमण के दौरान कई शास्त्रार्थ किये और पराजित हुए बगैर उन्होंने सनातन धर्म की सर्वोच्चता को प्रतिष्ठित कर दिग्विजय करने का काम किया: अमित शाह
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भगवान् आदिशंकर ने लोगों को दुविधा से बाहर निकालते हुए बताया कि निरंजन-निराकार भी आत्म-कल्याण का रास्ता है और सगुण-साकार भी आत्म-कल्याण का ही मार्ग है: अमित शाह
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जगतगुरु श्री निश्चलानंद सरस्वती जी ने कभी पीठ अथवा अपनी संस्थाओं के लिए मुझसे कुछ नहीं कहा, कहा तो देश की व्यवस्था के लिए कहा, देश के सुधार के लिए कहा और सनातन धर्म को आगे ले जाने के लिए कहा, यही विचार सनातन धर्म को सबसे ऊपर प्रतिष्ठित करता है: अमित शाह
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जब हम कहते हैं - ‘धर्म की जय हो’ - तो यह सभी धर्मों के लिए है, सत्य एवं सच्चाई की जीत के लिए है, ‘अधर्म का नाश हो' - तो यह बुराइयों के नाश के लिए है, ‘जगत' का कल्याण हो' - तो यह पूरे विश्व के कल्याण के लिए है, ‘प्राणियों में सद्भावना हो' - तो केवल मानव मात्र के लिए नहीं बल्कि संसार के सभी प्राणियों के कल्याण की बात इसमें निहित है: अमित शाह
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सनातन धर्म ने कभी भौगोलिक सीमाओं को नहीं माना, हमारा देश एक जियो-पॉलिटिकल देश नहीं बल्कि एक जियो-कल्चरल राष्ट्र है: अमित शाह
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भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह ने आज पुरी (उड़ीसा) में माँ विमलांबा प्रतिष्ठा महोत्सव में भाग लिया और इस अवसर पर आयोजित जन-सभा को संबोधित किया।

गोवर्धन मठ, पुरी पीठाधीश पूज्यपाद श्रीमद् शंकराचार्य जी के चरणों में प्रणाम करते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि जब-जब मैंने पूज्यपाद से मिलने का समय माँगा, हर बार उन्होंने समय दिया, बड़े स्नेह से मेरा मार्गदर्शन किया और सच्चे रास्ते पर चलने की प्रेरणा भी दी। उन्होंने कहा कि यह महाप्रभु जगन्नाथ का निवास तो है ही, साथ ही विश्व भर के हिन्दुओं के लिए एवं सनातन धर्मावलम्बियों के लिए अन्य कारणों से भी यह आस्था, विश्वास और श्रद्धा का केंद्र भी है क्योंकि यहाँ गोवर्धन पीठ है जहां से भगवान् आदिशंकर ने वेदों के संरक्षण व संवर्द्धन की शुरुआत की थी।

श्री शाह ने कहा कि पूज्यपाद आज जिस परम्परा के संरक्षण व संवर्धन का निर्वहन कर रहे हैं, उस परम्परा की शुरुआत जब लगभग 2500 वर्ष पहले हुई थी, तब हर तरफ सनातन धर्म पर संकट के बादल छाये हुए थे, सनातन धर्म के भविष्य को लेकर साधु-संत चिंतित थे, तब एक बालक ने आगे आकर आश्चर्यचकित कर देने वाली अपनी ज्ञान एवं मेधा के सहारे सनातन धर्म का पुनरुद्धार करते हुए इसे फिर से प्रतिष्ठित करने का काम किया। उन्होंने कहा कि पूज्य श्री उसी महान परम्परा के वाहक हैं और हमारा मार्गदर्शन कर रहे हैं।

श्री शाह ने कहा कि आश्चर्य होता है कि अल्पायु में ही एक व्यक्ति इतने सारे काम कैसे कर सकता है, तब मन यह मानने को लालायित हो उठता है कि यह बालक मानव नहीं बल्कि साक्षात भगवान् शंकर का अवतार है। उन्होंने कहा कि भगवान् आदिशंकर ने इतने अल्पकाल में ही चार पीठों को प्रतिस्थापित किया, चार-धाम को पुनः प्रतिष्ठित किया, 52 शक्तिपीठों की व्याख्या की, उनका पुनरुद्धार किया, ज्योतिर्लिंगों का भी पुनरुद्धार किया, संन्यास व्यवस्था को 10 अखाड़ों में बांटकर एक वैज्ञानिक व्यवस्था देने का भी काम किया। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही आचार्य शंकर ने अनेक प्रकार के भाष्यों की भी रचना की, चाहे वह श्रीमद्भागवद्गीता पर लिखा गया भाष्य हो या उपनिषद् पर लिखा गया भाष्य हो अथवा ब्रह्मसूत्र पर लिखा गया भाष्य हो। उन्होंने कहा कि जिस सरलता के साथ आचार्य शंकर ने इन भाष्यों की रचना करके देश व दुनिया के मार्गदर्शन के लिए लोगों के सामने रखा, मैं मानता हूँ कि आज भी सनातन धर्म अपने दैदीप्यमान अस्तित्त्व को यदि दुनिया के सामने रखे हुए है तो उसके मूल में भगवान् आदिशंकर के भाष्य हैं।

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि भगवान् आदिशंकर ने अपने भारत भ्रमण के दौरान कई शास्त्रार्थ किये और पराजित हुए बगैर उन्होंने सनातन धर्म की सर्वोच्चता को प्रतिष्ठित कर दिग्विजय करने का काम किया। उन्होंने कहा कि भगवान् आदिशंकर ने अखाड़ों की भी रचना की, इनकी कार्यपद्धतियों का भी निर्देशन किया और इसी कारण संन्यास एवं संत परम्परा इस देश में इतने अच्छे से चल रही है। उन्होंने कहा कि भगवान् आदिशंकर ने लोगों को दुविधा से बाहर निकालते हुए बताया कि निरंजन-निराकार भी आत्म-कल्याण का रास्ता है और सगुण-साकार भी आत्म-कल्याण का ही मार्ग है। उन्होंने कहा कि दोनों मार्गों पर चलते हुए किस तरह आत्म-कल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ा जा सकता है, इसका बेहतर समन्वय भगवान् आदिशंकर ने बनाया। उन्होंने कहा कि ज्ञान मार्ग और भक्ति मार्ग दोनों मार्ग आत्म-कल्याण के गंतव्य की ओर ले जाते हैं, ये बताने के लिए आचार्य शंकर ने सिर्फ एक ही पद ‘भज गोविंदम' की रचना करके लोगों को बताया कि अल्पज्ञ लोगों के लिए भी भक्ति मार्ग के जरिये आत्म-कल्याण का रास्ता खुला है। उन्होंने कहा कि पूज्यपाद आचार्य शंकर ने ज्ञान के सभी आयामों पर काम किया।

श्री शाह ने कहा कि इतने वर्षों की महान परम्परा का निर्वहन कर रहे जगतगुरु श्री निश्चलानंद सरस्वती जी के चरणों में जब-जब मुझे बैठने का मौक़ा मिला, उन्होंने कभी पीठ अथवा अपनी संस्थाओं के लिए कुछ नहीं कहा, उन्होंने कहा तो देश की व्यवस्था के लिए कहा, देश के सुधार के लिए कहा और सनातन धर्म को आगे ले जाने के लिए कहा, यही विचार सनातन धर्म को दुनिया में सबसे ऊपर प्रतिष्ठित करता है। उन्होंने कहा कि जब सनातन धर्म के हम सभी अनुयायी कहते हैं - ‘धर्म की जय हो - तो यह सभी धर्मों के लिए है, सत्य एवं सच्चाई की जीत के लिए है, ‘अधर्म का नाश हो' - तो यह बुराइयों के नाश के लिए है, ‘जगत' का कल्याण हो' - तो यह पूरे विश्व के कल्याण के लिए है, ‘प्राणियों में सद्भावना हो' - तो केवल मानव मात्र के लिए नहीं बल्कि संसार के सभी प्राणियों के कल्याण की बात इसमें निहित है। उन्होंने कहा कि हम सभी सनातन धर्मावलम्बी हर संकल्प करते वक्त विश्व के कल्याण की कामना करते हैं और संकल्प को भी विश्व कल्याण के लिए समर्पित कर देते हैं। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म ने कभी भौगोलिक सीमाओं को नहीं माना, हमारा देश एक जियो-पॉलिटिकल देश नहीं बल्कि एक जियो-कल्चरल राष्ट्र है। उन्होंने कहा कि हमारे सनातन धर्म की जो मूल परम्परा है, इसमें जो सत्य एवं ओजस्व है, परम्परा के अंदर जो ज्ञान है और विश्व का कल्याण करने की जो कामना इसके अंदर है, मेरी श्रद्धा है एवं मेरा विश्वास है कि आगे शुभ ही शुभ होने वाला है, फिर से इस महान परम्परा को विश्वगुरु के रूप में परतिष्ठित होना ही होना है।

श्री शाह ने कहा कि मैं पूज्यपाद के सामने इतना ही कहना चाहता हूँ को भौतिक विकास के सामने में दुनिया के अंदर विकास की एक प्रतिस्पर्द्धा लगी हुई है, हम नहीं चाहते कि भारत उस प्रतिस्पर्द्धा में पिछड़ जाए, भारत को विकास में आगे ही रहना है लेकिन देश की आध्यात्मिक उंचाई को एक इंच भी कम किये बगैर हम भारत को विश्व का सबसे समृद्ध देश बनाना चाहते हैं, यही प्रयास भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्त्व में केंद्र की भाजपा सरकार का है। उन्होंने कहा कि श्री नरेन्द्र भाई मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद पूरे देश ने उन्हें गौरव के साथ भाल पर त्रिपुंड लगाकर गंगा आरती भी करते हुए देखा और नेपाल में श्री पशुपतिनाथ महादेव की की पूजा-अर्चना भी करते हुए देखा। उन्होंने कहा कि आज दुनिया के कोई भी राष्ट्राध्यक्ष भारत के दौरे पर आते हैं तो भारत सरकार एवं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के द्वारा भेंट के रूप में श्रीमद्भागवद्गीता की पुस्तक दी जाती है। उन्होंने कहा कि योग की हमारी महान परम्परा को भी पूरी दुनिया में प्रतिष्ठित करने का काम प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र संघ के माध्यम से किया।

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि आज माँ विमला का भव्य मंदिर पूज्यपाद के मार्गदर्शन में बना है, प्राण-प्रतिष्ठा भी उन्हीं के माध्यम से हुई है, जिस तरह से महाप्रभु जगन्नाथ का मंदिर सबको शांति देता है, इसी तरह से माँ विमला का यह भव्य मंदिर सदियों तक श्रद्धालुओं को उनकी आत्मा की उन्नति के लिए प्रेरित करती रहेगी। इस अवसर पर आमंत्रित करने के लिए उन्होंने श्री गजपति जी का ह्रदय से आभार प्रकट किया।

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