Salient Points : Shri Amit Shah Inaugurating An Exhibition On Dr Shyama Prasad Mukheerjee - A Selfless Patriot At Nehru Memorial Museum, Teen Murti Bhawan

Wednesday, 29 June 2016


भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह द्वारा नेहरू मेमोरियल संस्थान, नई दिल्ली में 'डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी - एक निःस्वार्थ देशभक्त' के जीवन पर आयोजित प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए दिए गए संबोधन के मुख्य अंश


यदि कोई भी निष्पक्ष और तटस्थ रूप से भारत का इतिहास लिखता है तो निस्संदेह उसे डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी को एक विस्तृत जगह देनी पड़ेगी: अमित शाह
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यह कहते हुए मुझे तनिक भी संकोच नहीं है कि इतिहास में जो जगह श्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी को मिलना चाहिए था, वह उन्हें नहीं मिला: अमित शाह
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श्यामा प्रसाद जी के जीवन को तीन महत्त्वपूर्ण लक्ष्यों के आधार पर समझा जा सकता है - पहला बंगाल विभाजन, दूसरा भारतीय जनसंघ की स्थापना और तीसरा जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बनाने के लिए आंदोलन: अमित शाह
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किसी भी देश का विभाजन धर्म के आधार पर नहीं होना चाहिए लेकिन कांग्रेस ने धर्म के आधार पर भारत का बंटवारा स्वीकार किया: अमित शाह
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श्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने सत्ता छोड़कर अपने सिद्धांतों एवं देश सेवा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया और देश की मिट्टी के सुगंध से सुवासित देश के पुनर्निर्माण के उद्देश्य से जनसंघ की स्थापना की: अमित शाह
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यह श्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी के बलिदान का ही परिणाम है कि भारतीय जनता पार्टी आज विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनी है और पूर्ण बहुमत से देश की सरकार चला रही है: अमित शाह
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हम यदि अपनी संस्कृति, अपनी भाषा, अपनी सभ्यता, अपनी नींव और अपने इतिहास को संरक्षित नहीं रख सकते तो हम अपने देश का कदापि भला नहीं कर सकते: अमित शाह
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श्री श्यामा प्रसाद जी को यदि परमिट भंग के आरोप में ही पकड़ना था तो फिर उन्हें कश्मीर सीमा पर ही पकड़ना चाहिए था, फिर भी यदि उन्हें पकड़ा ही गया तो उनकी कस्टडी भारतीय पुलिस को न देकर जम्मू-कश्मीर पुलिस के हाथों में क्यों दे दी गयी: अमित शाह
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अगर रहस्यमय परिस्थिति में हुई उनकी मौत की जांच सही तरीके से की जाती तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाता: अमित शाह
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यह श्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी का ही बलिदान था कि जम्मू-कश्मीर के लिए स्पेशल परमिट समाप्त कर दिया गया और आज वहां भारतीय ध्वज शान के साथ लहरा रहा है: अमित शाह
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आज यदि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, पश्चिम बंगाल भारत का हिस्सा है तो उसकी नींव में डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी का बलिदान है: अमित शाह
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गांधी जी ने भी सार्वजनिक रूप से कहा था कि पंडित मदन मोहन मालवीय जी के बाद यदि हिन्दू समाज का कोई वास्तविक प्रतिनिधित्त्व कर सकता है तो वह केवल श्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी ही हैं: अमित शाह
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श्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी के जीवन पर आयोजित यह प्रदर्शनी हमारे कार्यकर्ताओं के जीवन से अज्ञान, भय और निराशा को दूर कर सतत हम सबका मार्गदर्शन करती रहेगी: अमित शाह
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भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह ने आज, बुधवार को नेहरू मेमोरियल संस्थान, तीन मूर्ति भवन, नई दिल्ली में 'डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी - एक निःस्वार्थ देशभक्त' के जीवन पर पर आयोजित प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए देश की एकता और अखंडता अक्षुण्ण रखने के लिए डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी के अभूतपूर्व योगदान पर विस्तार से चर्चा की। आज मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि नेहरू मेमोरियल संस्थान डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी के जीवन और उनके बलिदान पर एक प्रदर्शनी आयोजित कर रही है।

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि इतिहास ने जिस महापुरुष के साथ अन्याय किया है, जिसे सत्ता की रत्ती भर भी चाह नहीं थी, जो एक प्रतिष्ठित लेखक, वकील, शिक्षाविद और विचारक होने के साथ-साथ एक सच्चे राष्ट्रभक्त थे, जिन्होंने अपने देश की एकता और अखंडता के लिए अपने प्राणों की आहुति देने में भी देरी नहीं की, मैं ऐसे निर्मोही राजनेता और सच्चे व्यक्तित्त्व, डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी को याद करने के लिए इस समारोह में शामिल हुआ हूँ।

देश की एकता एवं अखण्डता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के अतुलनीय योगदान की चर्चा करते हुए श्री शाह ने कहा कि यदि कोई भी निष्पक्ष और तटस्थ रूप से भारत का इतिहास लिखता है तो निस्संदेह उसे डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी को एक विस्तृत जगह देनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति केवल और केवल अपने सिद्धांतों एवं अपने देश के बारे में सोचता हो, उन्हें इस बात की बिलकुल परवाह नहीं होती कि इतिहास उसके बारे में क्या लिखेगा। उन्होंने कहा कि यह जिम्मेवारी बनती है इतिहासकारों की कि वह व्यक्तित्त्व का उनके काम के आधार पर मूल्यांकन करे। उन्होंने कहा कि यह कहते हुए मुझे तनिक भी संकोच नहीं है कि इतिहास में जो जगह श्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी को मिलना चाहिए था, वह उन्हें नहीं मिला। उन्होंने कहा कि पहले तो अंग्रेजों ने और बाद में बामपंथी इतिहासकारों ने देश के इतिहास को अपने विचारों के अनुसार तथ्य को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करने का काम किया जो एक गंभीर और अक्षम्य अपराध है।

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि श्यामा प्रसाद जी के जीवन को तीन महत्त्वपूर्ण लक्ष्यों के आधार पर समझा जा सकता है, पहला - बंगाल विभाजन, दूसरा - भारतीय जनसंघ की स्थापना और तीसरा जम्मू कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बनाने के लिए आंदोलन।

बंगाल विभाजन आंदोलन की चर्चा करते हुए श्री शाह ने कहा कि भारत का विभाजन ही नहीं हुआ होता यदि कांग्रेस नेतृत्त्व उस वक्त जल्दबाजी न दिखाती। उन्होंने कहा कि किसी भी देश का विभाजन धर्म के आधार पर नहीं होना चाहिए लेकिन कांग्रेस ने धर्म के आधार पर देश का बंटवारा स्वीकार किया। पंजाब और बंगाल की चर्चा करते हुए कहा कि इन दोनों प्रदेशों में मुस्लिम बहुसंख्यक थे, इस तरह से बंगाल पाकिस्तान में चला जाता लेकिन श्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने बंगाल के विभाजन का प्रस्ताव रखा, इसके लिए व्यापक अभियान चलाया और इस पर एक परिचर्चा एवं संगोष्ठी आयोजित की, उनका मानना था कि पूरा बंगाल पाकिस्तान में नहीं जाना चाहिए। श्री शाह ने कहा कि डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के इस विचार को व्यापक जन-समर्थन मिला और इसने आंदोलन का रूप धारण किया। उन्होंने कहा कि उस वक्त आनंद बाजार पत्रिका ने बंगाल के विभाजन के मुद्दे पर एक सर्वेक्षण किया था जिसमें तकरीबन 98.9% मत बंगाल के विभाजन के पक्ष में पड़े थे। उन्होंने कहा कि इसी आंदोलन के परिणामस्वरूप आज पश्चिम बंगाल भारत का हिस्सा है, आज यदि पश्चिम बंगाल भारत का हिस्सा है, आज यदि कोलकाता भारत का हिस्सा है और इसका श्रेय यदि किसी एक को दिया जा सकता है तो निश्चित रूप से डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी हैं।

भारतीय जन संघ की स्थापना की चर्चा करते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि श्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी को जब यह आभास होने लगा कि अगर कांग्रेस की इन्हीं नीतियों और विचारधारा पर देश आगे बढ़ता रहा तो देश बहुत जल्द ही काफी पीछे चला जाएगा, तब वे अपने आपको सरकार में रहते हुए काफी असहज महसूस करने लगे। उन्होंने कहा कि पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान में हिन्दू अल्पसंख्यकों पर दमनात्मक कार्रवाई को लेकर डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आवाज बुलंद किया लेकिन नेहरू जी ने पाकिस्तान के साथ जब इस मुद्दे पर द्विपक्षीय समझौता कर लिया और हिन्दू अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों से मुंह मोड़ लिया तब श्री मुखर्जी को इस बात का गहरा आघात लगा और उन्होंने बिना देरी किये मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। श्री शाह ने कहा कि जब उन्हें देश की एकता, अखंडता खतरे में दिखाई देने लगी, जब उन्हें यह आभास हो गया कि हमें अंग्रेजों से तो आजादी मिली, लेकिन हम अब भी गुलाम हैं, नीतियों का निर्धारण देश के लिए हो ही नहीं रहा है तब श्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने देश को एक वैकल्पिक विचारधारा देते हुए 1951 में जनसंघ की स्थापना की। उन्होंने कहा कि श्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने सत्ता छोड़कर अपने सिद्धांतों तथा देश सेवा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया और उन्होंने देश की मिट्टी के सुगंध से सुवासित देश के पुनर्निर्माण के उद्देश्य से जनसंघ की स्थापना की, यह उन्हीं के बलिदान का परिणाम है कि भारतीय जनता पार्टी आज विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनी है और पूर्ण बहुमत से देश की सरकार चला रही है। उन्होंने कहा कि जनसंघ की स्थापना श्यामा प्रसाद जी ने किसी राजनीतिक स्वार्थ या सत्ता प्राप्ति के लिए नहीं की थी बल्कि एक वैकल्पिक सोच के साथ इस देश की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण रखने के लिए की थी। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि यदि डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने जनसंघ की स्थापना नहीं की होती तो देश का बहुत बड़ा नुकसान हो चुका होता। उन्होंने कहा कि हम यदि अपनी संस्कृति, अपनी भाषा, अपनी सभ्यता, अपनी नींव और अपने इतिहास को संरक्षित नहीं रख सकते तो हम अपने देश का कदापि भला नहीं कर सकते।

डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी के नेतृत्त्व में जमू-कश्मीर आंदोलन की चर्चा करते हुए श्री शाह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के ऊपर हालांकि नेहरू जी की कई नीतियाँ भारत के लिए समस्या का कारण बनी लेकिन एक नीति काफी गंभीर थी और वह यह कि यदि कोई भी जम्मू-कश्मीर जाना चाहता है तो उसे भारत के रक्षा मंत्रालय से एक परमिट लेना पडेगा। उन्होंने कहा कि श्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने कहा, ऐसा नहीं चलेगा, हमें अपने देश में कहीं भी बेरोकटोक जाने की आजादी होनी चाहिए और इसके लिए, जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बनाने के लिए उन्होंने आंदोलन शुरू किया और अपने इसी संकल्प को पूरा करने के लिये वे 1953 में बिना परमिट लिये जम्मू कश्मीर की यात्रा पर निकल पड़े, कश्मीर पहुँचते ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और अमानवीय तरीके से उन्हें कालकोठरी में कैद कर लिया गया जहां रहस्यमय परिस्थितियों में उनका असमय ही निधन हो गया। श्री शाह ने सवाल उठाते हुए कहा कि श्री श्यामा प्रसाद जी को यदि परमिट भंग के आरोप में ही पकड़ना था तो फिर उन्हें कश्मीर सीमा पर ही पकड़ना चाहिए था, फिर भी यदि उन्हें पकड़ा ही गया तो उनकी कस्टडी भारतीय पुलिस को न देकर जम्मू-कश्मीर पुलिस के हाथों में क्यों दे दी गयी? उन्होंने कहा कि अगर रहस्यमय परिस्थिति में हुई उनकी मौत की जांच सही तरीके से की जाती तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाता। उन्होंने कहा कि यह श्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी का ही बलिदान था कि जम्मू-कश्मीर के लिए स्पेशल परमिट समाप्त कर दिया गया और आज वहां भारतीय ध्वज शान के साथ लहरा रहा है। उन्होंने कहा कि आज यदि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है तो उसकी नींव में डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी का बलिदान है।

श्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी के व्यक्तित्त्व की चर्चा करते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि गांधी जी ने भी सार्वजनिक रूप से कहा था कि पंडित मदन मोहन मालवीय जी के बाद यदि हिन्दू समाज का कोई वास्तविक प्रतिनिधित्त्व कर सकता है तो वह केवल श्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी ही हैं। उन्होंने कहा कि महाबोधि समाज ने एक ही बार गैर-बोधि समाज से किसी को अपना अध्यक्ष बनाया और वह थे श्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी। उन्होंने कहा कि यदि पंडित दीनदयाल उपाध्याय और श्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की जोड़ी कुछ समय और जीती तो देश कहीं का कहीं पहुँच गया होता। उन्होंने कहा कि श्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी के जीवन पर आयोजित यह प्रदर्शनी हमारे कार्यकर्ताओं के जीवन से अज्ञान, भय और निराशा को दूर कर सतत हम सबका मार्गदर्शन करती रहेगी।

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