Salient Points : Speech by BJP National President, Shri Amit Shah Addressing “Tiranga Yatra” Rally In Ullal, Mangalore, Karnataka

Sunday, 21 August 2016


भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह द्वारा उल्लाल, मंगलोर (कर्नाटक) में देश की आजादी के 70 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित ‘तिरंगा यात्रा’ रैली में दिए गए भाषण के मुख्य अंश


आज अपने लिए नहीं, देश के लिए जीने की जरूरत है और यही संदेश युवाओं तक पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने देश भर में इस ‘तिरंगा यात्रा' का आयोजन किया है: अमित शाह
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अब्बक्का रानी वीरता, त्याग और बलिदान की अदम्य प्रेरणास्रोत हैं, हमें इनके जीवन को जनता तक पहुंचाना चाहिए ताकि वे इनसे प्रेरणा लेकर देश के लिए कुछ कर गुजरने का संकल्प लें: अमित शाह
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फ्रीडम ऑफ़ स्पीच देश में हर जगह है। किसी व्यक्ति, पार्टी अथवा किसी सिद्धांत के सामने विचार रखिये, हमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन राष्ट्र के विरुद्ध विचारों को फ्रीडम ऑफ़ स्पीच का चोला नहीं पहनाया जा सकता: अमित शाह
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'फ्रीडम ऑफ़ स्पीच' के नाम पर देश को बांटने की विचारधारा के खिलाफ एकजुट होने की जरूरत है। मैं राष्ट्र से आह्वान करता हूँ कि यदि कुछ गिने-चुने लोग ऐसे प्रयास देश के खिलाफ करते हैं तो उसे अलग-थलग कर दीजिये, यह देश राष्ट्रवाद के अलावे किसी और सिद्धांत पर नहीं चल सकता: अमित शाह
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देशभक्ति और राष्ट्रवाद के संस्कार के बगैर कोई राष्ट्र एक नहीं रह सकता। यह 'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम' का ही नारा था जिसने देश के वीर सपूतों को एक सूत्र में बांधकर उन्हें देश के लिए मर मिटने की प्रेरणा दी: अमित शाह
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मैं आज देश भर के युवाओं से अपील करना चाहता हूँ कि पहले वे अपने देश के इतिहास को अच्छे तरीके से पढ़ें ताकि उन्हें देश के लिए मर मिटने वाले अमर शहीदों के बलिदान के बारे में पता चल सके: अमित शाह
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यदि युवाओं को प्रेरणा लेनी है तो उन्हें यह ऐसे देश विरोधी नारा लगाने वाले एनजीओ से नहीं मिल सकता, उन्हें यह शहीद भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस जैसे महापुरुषों के जीवन से ही मिल सकता है: अमित शाह
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मुझे पूर्ण विश्वास है देश के युवाओं पर कि वे राष्ट्रभक्ति को हमारे समाज का अभिन्न अंग और एक महत्त्वपूर्ण संस्कार बनाकर रखेंगें: अमित शाह
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एक आदर्श राष्ट्र के लिए चार लक्ष्यों का होना आवश्यक है: जो अपनी संप्रभुता के साथ अपनी सीमाओं की सुरक्षा कर सके, जिसका दुनिया में मान-सम्मान हो, जो समृद्ध और सुसंस्कृत हो और जो कल्याण राज्य की परिकल्पना पर आधारित एक वेलफेयर स्टेट की स्थापना कर पाए: अमित शाह
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सच्चे अर्थों में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्त्व में केंद्र की भाजपा सरकार एक आदर्श राष्ट्र के सभी चार लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में सही तरीके से और तेज गति से काम कर रही है: अमित शाह
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श्री नरेन्द्र भाई मोदी ने प्रधानमंत्री बनने से पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि यदि देश में भाजपा की सरकार बनती है तो हम 'सबका साथ, सबका विकास' के सिद्धांत पर काम करेंगें, सबको साथ लेकर देश का विकास करेंगें और मुझे खुशी है कि इसी सिद्धांत के आधार पर आज देश प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है: अमित शाह
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के ढ़ाई वर्षों के शासन में ही दुनिया फिर से यह मानने लगी है कि 21वीं सदी हिन्दुस्तान की सदी है: अमित शाह
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आज सीमा पर जवाबी कार्रवाई के लिए सेना के जवानों को दिल्ली से आदेश लेने की कोई जरूरत नहीं है। हम संघर्ष नहीं, शांति चाहते हैं लेकिन यदि कोई हमारी सीमा का उल्लंघन करेगा तो हम उसे कदापि बर्दाश्त नहीं करेंगें: अमित शाह
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भारत की संस्कृति को विश्व व्यापी पहचान दिलाने की जो पहल प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने किया है वह अप्रतिम है: अमित शाह
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भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, श्री अमित शाह ने आज, रविवार को वीरांगना अब्बक्का रानी की कर्मभूमि उल्लाल, मंगलोर (कर्नाटक) में देश की आजादी के 70 साले पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित तिरंगा यात्रा में भाग लिया और देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले लाखों नाम-अनाम शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किया। इस अवसर पर उन्होंने देश पर कुर्बान होने वाले वीर शहीदों की याद में आयोजित सम्मेलन को भी संबोधित किया।

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि आजादी के 70 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी ने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले देश के लाखों-करोड़ों वीर सपूतों को श्रद्धांजलि देने के लिए एवं उनकी कर्मठता, त्याग और संस्कार से देश के युवाओं को परिचित कराने के लिए इस ’तिरंगा यात्रा' का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से देश की नई पीढ़ी को देश के लिए कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने कहा कि आज अपने लिए नहीं, देश के लिए जीने की जरूरत है और यही संदेश युवाओं तक पहुंचाने के लिए इस ‘तिरंगा यात्रा' का आयोजन देश भर में किया गया है। उन्होंने कहा कि चाहे बहादुरशाह जफ़र, रानी लक्ष्मीबाई, वीर कुंअर सिंह और तात्या टोपे जैसे वीर सपूतों के नेतृत्त्व में शुरू हुई भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम हो, या चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, सुखदेव, रामप्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह, अशफाकउल्ला खां, खुदीराम बोस, मदनलाल धींगरा जैसे आजादी के परवानों के नेतृत्त्व में देश भर में चलाई गई क्रान्ति की मशाल हो, या सुभाषचंद्र बोस के नेतृत्त्व में देश की आजादी के लिए आजाद हिंद फ़ौज का प्रयास हो या फिर महात्मा गांधी, बाल गंगाधर तिलक और पूज्य गोखले के नेतृत्त्व में भारत की स्वतंत्रता के लिए अहिंसा के पथ पर चलाये गए आंदोलन हो, हमें इन सबके समर्पित प्रयासों से ही आजादी नसीब हुई है। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के लिए हम 1857 से ही सशस्त्र क्रांति की मशाल लेकर चले थे, यह दुर्भाग्य था कि हमारा पहला प्रयास विफल गया लेकिन इसके कारण ही लोगों में जनचेतना का संचार हुआ, हम देश के उन महान क्रांतिकारियों के योगदान को भुला नहीं सकते। कई क्रांतिकारी आन्दोलनों का जिक्र करते हुए श्री शाह ने कहा कि चाहे वह जालियांवाला बाग़ कांड हो, या काकोरी कांड या फिर सदन में भगत सिंह द्वारा बम फोड़कर अंग्रेजों की बहरी सरकार को जगाने का प्रयास हो, इन आंदोलनों ने देश की जनता के चेतना, विचार और बुद्धि को झकझोर कर रख दिया और पूरे देश का एक ही लक्ष्य बन गया - आजादी।

श्री शाह ने कहा कि आजादी के बाद संविधान का निर्माण करते वक्त कन्हैयालाल मुंशी जी ने राष्ट्र की व्याख्या करते हुए कहा था कि एक आदर्श राष्ट्र के लिए चार लक्ष्यों का होना आवश्यक है: पहला - एक ऐसा राष्ट्र जो अपनी संप्रभुता के साथ अपनी सीमाओं की सुरक्षा कर सके, दूसरा - एक ऐसा राष्ट्र जिसका दुनिया में मान-सम्मान हो, तीसरा - एक ऐसा राष्ट्र जो समृद्ध और सुसंस्कृत हो और चौथा - एक ऐसा राष्ट्र जो कल्याण राज्य की परिकल्पना पर आधारित एक वेलफेयर स्टेट की स्थापना कर पाए। उन्होंने कहा कि इन चारों लक्ष्यों को ध्यान में रखकर ही हमारे संविधान का निर्माण हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकारों को इस बात का प्रयास करना चाहिए कि गरीब से गरीब व्यक्ति को भी सम्मान के साथ जीने का हक़ मिले। उन्होंने कहा कि जिस आजादी के लिए, जिस संविधान के लिए और संविधान के माध्यम से जिस स्वराज के लिए वीर शहीदों ने अपनी कुर्बानी दी, उसे चरितार्थ करने के लिए सरकारों को प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि 2014 के लोक सभा चुनावों के पहले ही श्री नरेन्द्र मोदी ने स्पष्ट कर दिया था कि यदि देश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनती है तो हमारी सरकार 'सबका साथ, सबका विकास' के सिद्धांत पर काम करेगी, सबको साथ लेकर देश का विकास करेगी और हमें इस बात की खुशी है कि इसी के आधार पर आज देश प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है।

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के शासनकाल में दुनिया भर में भारत की जो छवि बनी थी, कांग्रेस के 10 वर्षों के शासनकाल में वह व्यापक छवि पूरी तरह से धूमिल हो गई लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के ढ़ाई वर्षों के शासन में ही दुनिया फिर से यह मानने लगी है कि 21वीं सदी हिन्दुस्तान की सदी है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया के सभी प्रमुख देश भारत के साथ एक सुदृढ़ रिश्ता बनाने के लिए लालायित हैं, मोदी जी का हर जगह जोरदार स्वागत होता है और विश्व भर के लोग उनको सुनने के लिए उत्सुक रहते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने दुनिया के प्रथम पंक्ति के देशों में भारत को प्रतिस्थापित करने का काम किया है, इसके साथ ही उन्होंने सीमाओं की सुरक्षा और सेना के तीनों अंगों को अत्याधुनिक बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि आज सीमा पर जवाबी कार्रवाई के लिए सेना के जवानों को दिल्ली से आदेश लेने की कोई जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि हम संघर्ष नहीं चाहते, हम शान्ति चाहते हैं लेकिन अगर कोई हमारी सीमा का उल्लंघन करेगा तो हम उसे कदापि बर्दाश्त नहीं करेंगें।

श्री शाह ने कहा कि पहली बार मोदी जी के नेतृत्त्व में देश की फॉरेन पालिसी के अन्तर्गत व्यापार और संस्कृति को उसका महत्त्वपूर्ण अंग बनाया गया है। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति को विश्व व्यापी पहचान दिलाने की जो पहल प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने किया है वह अप्रतिम है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने संयुक्त राष्ट्र संघ में दुनिया के सभी देशों को योग आधारित जीवन शैली अपनाने की अपील की और लगभग 170 से अधिक देशों ने इसकी तत्काल स्वीकृति देकर 21 जून को 'विश्व योग दिवस' के रूप में मनाने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि भारत को एक लोक-कल्याण राष्ट्र बनाने की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने देश के 21 करोड़ गरीब परिवारों के बैंक अकाउंट खोलकर उन्हें देश के अर्थतंत्र से जोड़ा। श्री शाह ने कहा की इस बैंक अकाउंट के माध्यम से देश के गरीब, शोषित, वंचित, दलित, पिछड़े और किसानों को जीवन बीमा, सुरक्षा बीमा, अटल पेंशन योजना, डीबीटी, फसल बीमा योजनाओं द्वारा दी जाने वाली सहायता राशि को सीधे उनके अकाउंट में हस्तांतरित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सच्चे अर्थों में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्त्व में केंद्र की भाजपा सरकार एक आदर्श राष्ट्र के सभी चार लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में सही तरीके से और तेज गति से काम कर रही है।

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि आज देश में कुछ मुट्ठी भर लोगों ने राष्ट्रवाद पर प्रश्नचिह्न लगना शुरू किया है, फ्रीडम ऑफ़ स्पीच के नाम पर राष्ट्रवाद पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए एक नई विचारधारा लाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर राष्ट्रवाद और देशभक्ति न होती तो आज आज यह देश आजाद ही न हुआ होता, आखिर देश को बांटने की यह कौन सी सोच है? उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि पूरे देश को इस तरह के विचारों के खिलाफ एकजुट होने की जरूरत है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि देशभक्ति और राष्ट्रवाद के संस्कार के बगैर कोई राष्ट्र एक नहीं रह सकता। उन्होंने कहा कि यह 'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम' का ही नारा था जिसने देश के वीर सपूतों को एक सूत्र में बांधकर उन्हें देश के लिए मर मिटने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों से दो-दो हाथ करने का प्रेरणास्रोत भी यही नारे थे। उन्होंने कहा कि अल्पायु में ही देश की आजादी के लिए फांसी को हँसते-हँसते गले लगाते वक्त वीर भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, खुदीराम बोस जैसे क्रांतिकारी के जबान पर भी यही नारा था। उन्होंने कहा कि फ्रीडम ऑफ़ स्पीच के लिए ही भगत सिंह ने संघर्ष किया और इसी के लिए उन्हें फांसी की सजा अंग्रेजों ने दी और उनके इसी संघर्ष एवं राष्ट्रवादी बलिदान का ही नतीजा है कि देश को एक नया संविधान मिला।

श्री शाह ने कहा कि मैं आज देश भर के युवाओं से अपील करना चाहता हूँ कि पहले वे अपने देश के इतिहास को अच्छे तरीके से पढ़ें ताकि उन्हें पता चल सके कि इस देश की आजादी के लिए और इसके विकास के लिए कन्याकुमारी से लेकर हिमालय तक और गुजरात से लेकर असम तक वीर शहीदों ने कैसे अपना बलिदान दिया है।

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि फ्रीडम ऑफ़ स्पीच देश में हर जगह है, किसी व्यक्ति, पार्टी अथवा किसी सिद्धांत के सामने विचार रखिये, हमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन राष्ट्र के विरुद्ध विचारों को फ्रीडम ऑफ़ स्पीच का चोला नहीं पहनाया जा सकता। उन्होंने कहा कि मैं राष्ट्र से आह्वान करता हूँ कि यदि कुछ गिने-चुने लोग ऐसे प्रयास देश के खिलाफ करते हैं तो उसे अलग-थलग कर दीजिये, यह देश राष्ट्रवाद के अलावे किसी और सिद्धांत पर नहीं चल सकता। उन्होंने कहा कि यदि युवाओं को प्रेरणा लेनी है तो उन्हें यह ऐसे देश विरोधी नारा लगाने वाले एनजीओ से नहीं मिल सकता, उन्हें यह शहीद भगत सिंह, वासुदेव बलवंत फड़के, चंद्रशेखर आजाद, महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस जैसे महापुरुषों के जीवन से ही मिल सकता है। उन्होंने कहा कि मुझे पूर्ण विश्वास है देश के युवाओं पर कि वह राष्ट्रभक्ति को हमारे समाज का अभिन्न अंग और एक महत्त्वपूर्ण संस्कार बनाकर रखेंगें।

इस अवसर पर वीरांगना अब्बक्का रानी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि 40 सालों तक वीरांगना अब्बक्का रानी ने कर्नाटक के इस इलाके की विदेशी आक्रमणकारियों से रक्षा की, अनेकों लड़ाइयां लड़ीं, जेल भी गईं और अपने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति भी दी। उन्होंने कहा कि अब्बक्का रानी वीरता, त्याग और बलिदान की अदम्य प्रेरणास्रोत हैं, हमें इनके जीवन को जनता तक पहुंचाना चाहिए ताकि वे इनसे प्रेरणा लेकर देश के लिए कुछ कर गुजरने का संकल्प लें। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि हम वीरांगना अब्बक्का रानी को आज उन लाखों अनाम शहीदों का प्रतिनिधि मानकर उन्हें मन से श्रद्धांजलि दें और देश की आजादी के 70 साल पूरे होने पर हम अपने आप को देश के लिए पूर्ण समर्पित करने का संकल्प लें।

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