Union Home Minister and Minister of Cooperation, Shri Amit Shah replied to the discussion on Jammu and Kashmir Reservation (Amendment) Bill, 2023 and Jammu and Kashmir Reorganization (Amendment) Bill, 2023 in the Rajya Sabha today, House passed the bills after discussion

Press | Dec 11, 2023

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज राज्य सभा में जम्मू और कश्मीर आरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2023 और जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2023 पर चर्चा का जवाब दिया, सदन ने बिल को पारित किया



आज का दिन जम्मू और कश्मीर और भारत के इतिहास में स्वर्णाक्षरों से अंकित होगा जब सर्वोच्च न्यायालय ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा लिए गए निर्णय के तहत धारा 370 को समाप्त करने और जम्मू और कश्मीर के पुनर्गठन की मंशा और प्रक्रिया को संवैधानिक घोषित किया है

विपक्ष द्वारा इन विधेयकों के बारे में उठाए गए सवाल न्याय के लिए नहीं थे बल्कि मोदी जी द्वारा लिए गए निर्णय को लंबित करने के इरादे से किए गए थे

सुप्रीम कोर्ट ने आज माना कि जम्मू और कश्मीर के पास कभी आंतरिक संप्रभुता नहीं थी और अनुच्छेद 370 एक अस्थायी प्रावधान था

किसी को यह अधिकार नहीं कि अपना बड़ा हृदय दिखाने के लिए देश के एक हिस्से को जाने दे। हम तो एक-एक इंच जमीन के लिए लड़ेंगे

 धारा 370 को परमानेंट कहने वाले लोग देश के संविधान और संविधान सभा का अपमान कर रहे हैं

अब कश्मीर से विस्थापित हुए लोग कश्मीर में चुनाव भी लड़ सकते हैं और मंत्री भी बन सकते हैं

हमारी सेना जीत रही थी, और दुश्मन सेना पीछे हट रही थी उस वक्त अगर नेहरु जी दो दिन और रुक जाते और सीजफायर नहीं करते तो आज पूरा कश्मीर हमारा होता

550 से ज्यादा रियासतों का भारत में विलय हुआ, कहीं भी धारा 370 नहीं लगी, सिर्फ जम्मू-कश्मीर नेहरू जी देख रहे थे, तो वहीं क्यों लगी?

तीन परिवारों ने अपने फायदे के कारण जम्मू-कश्मीर के ST समुदाय को उनके अधिकारों से वंचित रखा

जम्मू और कश्मीर में 42 हज़ार लोग मारे गए हैं क्योंकि धारा 370 अलगाववाद को बल देती थी और इसके कारण वहां आतंकवाद खड़ा होता था

 पहले जम्मू में 37 सीटें थीं जो अब 43 हो गई हैं, कश्मीर में पहले 46 सीटें थीं वो अब 47 हो गई हैं और पाक-अधिकृत कश्मीर की 24 सीटें रिज़र्व रखी गई हैं, क्योंकि पाक अधिकृत कश्मीर भारत का है और इसे हमसे कोई नहीं छीन सकता

जम्मू और कश्मीर के इतिहास में पहली बार 9 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित की गई हैं और अनुसूचित जाति के लिए भी सीटों का आरक्षण किया गया है

गुर्जर भाइयों की सीट कम किये बिना मिलेगा बकरवाल भाइयों को आरक्षण का लाभ

जहां तक देश की एक भी इंच ज़मीन का सवाल है, मोदी सरकार का नज़रिया तंग है और रहेगा, हम दिल बड़ा नहीं कर सकते

अगर धारा 370 इतनी ही उपयोगी थी, तो नेहरु जी ने उसके साथ 'टेम्पररी' शब्द का उपयोग क्यों किया?

अब जम्मू-कश्मीर के युवाओं के हाथों में बन्दूक नहीं लैपटॉप होंगे, मोदी जी के नेतृत्व में नए कश्मीर बनने की शुरुआत हो गयी है

सभी जानते हैं कि कश्मीर के विलय में इसलिए देरी हुई थी, क्योंकि शेख अब्दुल्ला को विशेष स्थान देने का आग्रह था और इस कारण विलय में देरी हुई और पाकिस्तान को आक्रमण करने का मौका मिला

 

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज राज्य सभा में जम्मू और कश्मीर आरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2023 और जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2023 पर चर्चा का जवाब दिया। चर्चा के बाद सदन ने बिल को पारित कर दिया। लोक सभा पहले ही दोनों विधेयकों को पारित कर चुकी है।


विधेयकों पर चर्चा का जवाब देते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आज का दिन जम्मू और कश्मीर और भारत के इतिहास में स्वर्णाक्षरों से अंकित होगा जब सर्वोच्च न्यायालय ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा लिए गए निर्णय के तहत धारा 370 को समाप्त करने और जम्मू और कश्मीर के पुनर्गठन की मंशा और प्रक्रिया को संवैधानिक घोषित किया है। उन्होंने कहा कि इन विधेयकों के बारे में उठाए गए सवाल न्याय के लिए नहीं थे बल्कि मोदी जी द्वारा लिए गए निर्णय को लंबित करने के इरादे से किए गए थे। उन्होंने कहा कि आज सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दे दिया और कई चीज़ों को, जिन्हें 1950 से हम बताते रहे, अमली जामा पहना दिया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने आज माना कि जम्मू और कश्मीर के पास कभी आंतरिक संप्रभुता नहीं थी और अनुच्छेद 370 एक अस्थायी प्रावधान था। श्री शाह ने कहा कि अगर धारा 370 न्यायिक और ज़रूरी थी, तो इसके सामने टेंपरेरी शब्द क्यों लिखा गया। उन्होंने कहा कि जो कहते हैं कि धारा 370 स्थायी है, वो संविधान और संविधान सभा की मंशा का अपमान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान और देश की संसद को धारा 370 को हटाने का पूरा अधिकार है।


श्री अमित शाह ने कहा कि आज सर्वोच्च न्यायालय ने ये भी माना कि राज्यपाल शासन और राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा को चुनौती देना ठीक नहीं है और ये पूर्ण रूप से संवैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप है। श्री शाह ने कहा कि अनुच्छेद 370 (3) के प्रावधान को संविधान सभा ने ही तय किया और ये कहा गया कि भारत के माननीय राष्ट्रपति धारा 370 में सुधार कर सकते हैं, इस पर रोक लगा सकते हैं और इसे संविधान से बाहर भी कर सकते हैं। उन्होंने कहा सुप्रीम कोर्ट ने आज ये भी माना कि 5 अगस्त, 2019 को तत्कालीन राष्ट्रपति जी को अनुच्छेद 370 का संचालन बंद करने का पूर्ण अधिकार है। श्री शाह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने ये भी माना कि धारा 370 के तहत मिली हुई शक्तियों का प्रयोग करते हुए राष्ट्रपति महोदय एकतरफा सूचना जारी कर सकते हैं जिसे संसद के दोनों सदनों का साधारण बहुमत से अनुमोदन चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी माना कि जब धारा 370 समाप्त हो चुकी है, तो ऐसे में जम्मू और कश्मीर के संविधान का कोई अस्तित्व नहीं रह जाता है। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने अपने आदेश में चुनाव कराने के लिए भी निर्वाचन आयोग को निर्देश दिए हैं। श्री शाह ने यह भी कहा कि गृह मंत्री के रूप में वे चुनाव करवाने की बात स्वयं सदन में कह चुके हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने कहा है कि इस निर्णय के बावजूद वो मानते हैं कि धारा 370 को गलत तरीके से हटाया गया है। गृह मंत्री ने कहा कि जम्मू और कश्मीर में 42 हज़ार लोग मारे गए हैं क्योंकि धारा 370 अलगाववाद को बल देती थी और इसके कारण वहां आतंकवाद खड़ा होता था। उन्होंने कहा कि जब समय ये सिद्ध कर दे कि किसी से कोई गलत फैसला हुआ है, तो देशहित में उसे वापस आना चाहिए और इसके लिए अभी भी समय है।


केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि कमज़ोर औऱ वंचित वर्ग किसी भी नागरिक के सम्मान को चोट पहुंचाने वाला नाम है। उन्होंने कहा कि इस कानून में कमज़ोर और वंचित की जगह अन्य पिछड़ा वर्ग नाम जोड़ने का फैसला प्रधानमंत्री मोदी जी ने लिया है। उन्होंने कहा कि जम्मू और कश्मीर में आतंकवाद की शुरूआत 1989 में हुई और बाद में यह चरम पर पहुंचा। इसके कारण हज़ारों विस्थापित हुए लोग, विशेषकर कश्मीरी पंडित और सिख, देशभर में बिखर गए और अपने ही देश में निराश्रय हो गए। उन्होंने कहा कि इन विस्थापित कश्मीरियों को गले लगाने का काम पूरे देश ने किया। श्री शाह ने कहा कि 46,631 परिवार कश्मीर से विस्थापित हुए और मोदी सरकार के कई प्रयासों से अब तक 1 लाख 57 हज़ार 967 लोग रजिस्टर्ड हुए हैं। उन्होने कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार विस्थापितों को न्याय देने के प्रति कटिबद्ध है, ऐसे लोग मतदान भी कर सकेंगे, चुनाव भी लड़ सकेंगे और जम्मू और कश्मीर में मंत्री भी बन सकेंगे।


श्री अमित शाह ने कहा कि 1947 में 31,779 परिवार पाक-अधिकृत कश्मीर से जम्मू और कश्मीर में विस्थापित हुए और इनमें से 26,319 परिवार जम्मू और कश्मीर में और 5,460 परिवार देशभर के अन्य हिस्सों में रहने लगे। उन्होंने कहा कि 1965 और 1971 में हुए युद्धों के बाद 10,065 परिवार विस्थापित हुए और कुल मिलाकर 41,844 परिवार विस्थापित हुए। उन्होंने कहा कि इन विधेयकों के माध्यम से 2 सीटें कश्मीरी विस्थापितों और 1 सीट पाक-अधिकृत कश्मीर से विस्थापित लोगों के लिए नामांकित करने का काम प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने संवेदना के साथ किया है। श्री शाह ने कहा कि पहले जम्मू में 37 सीटें थीं जो अब 43 हो गई हैं, कश्मीर में पहले 46 सीटें थीं वो अब 47 हो गई हैं और पाक-अधिकृत कश्मीर की 24 सीटें रिज़र्व रखी गई हैं, क्योंकि पाक अधिकृत कश्मीर भारत का है और इसे हमसे कोई नहीं छीन सकता। जम्मू और कश्मीर के इतिहास में पहली बार 9 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित की गई हैं और अनुसूचित जाति के लिए भी सीटों का आरक्षण किया गया है। उन्होंने कहा कि जब भी युद्ध हुआ और आतंकवादियों ने हमला किया तब हमेशा हमारे गुर्जर-बकरवाल भाइयों ने देश के तिरंगे को ऊंचा किया और आज सालों बाद उन्हें न्याय मिलने जा रहा है। श्री शाह ने कहा कि जम्मू और कश्मीर की अनुसूचित जनजातियों के अधिकारों को तीन परिवार रोक कर बैठे थे, जो धारा 370 को एन्जॉय कर रहे थे। उन्होने कहा कि गुर्जर भाइयों की एक भी सीट लिए बिना बहुत संवेदनशीलता के साथ बकरवाल भाइयों को सभी लाभ दिए जाएंगे।


केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि जहां तक देश की एक भी इंच ज़मीन का सवाल है, मोदी सरकार का नज़रिया तंग है और रहेगा और हम इसके लिए दिल बड़ा नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि किसी को यह अधिकार नहीं है कि बड़ा दिल दिखाने के लिए देश का भूभाग चले जाने पर मूक दर्शक बन कर बैठे रहें। गृह मंत्री ने कहा कि जो आजादी के बाद के भारत की रचना को जानते हैं, उन्हें मालूम होगा कि हैदराबाद में कश्मीर से भी बड़ी प्रॉब्लम हुई थी , लेकिन क्या जवाहरलाल नेहरू गए वहाँ थे या फिर जूनागढ़, लक्षद्वीप या जोधपुर में जवाहरलाल नेहरू गए थे। उन्होंने कहा कि जवाहरलाल नेहरू ने सिर्फ एक ही जगह जम्मू-कश्मीर का  काम देखा था और उसे भी वे आधा छोड़कर आ गए। उन्होंने कहा कि 550 से ज्यादा रियासतों का भारत में विलय हुआ, कहीं भी धारा 370 नहीं लगी, सिर्फ जम्मू-कश्मीर नेहरू जी देख रहे थे, तो वहीं क्यों लगी? कश्मीर में विलय में हुई देरी के बारे में श्री शाह ने कहा कि महाराजा पर शेख अब्दुल्ला को विशेष स्थान देने का आग्रह था और इसी कारण विलय में देर हुई और पाकिस्तान को आक्रमण करने का मौका मिला। गृह मंत्री ने विपक्ष से सवाल किया कि इतने सारे कठिन राज्यों का विलय हुआ, लेकिन कहीं पर भी धारा 370 क्यों नहीं है। श्री शाह ने कहा कि न तो जूनागढ़, जोधपुर, हैदराबाद और न ही लक्षद्वीप में धारा 370 है। उन्होंने कहा कि धारा 370 की शर्त किसने रखी और सेना भेजने में देरी क्यों हुई, विपक्ष को इसका जवाब जनता को देना होगा।


गृह मंत्री ने कहा कि यह सर्वविदित है कि अगर असमय सीजफायर नहीं होता तो पाक अधिकृत कश्मीर नहीं होता। उन्होंने कहा कि अगर उस समय दो दिन और रुक गये होते तो पूरा पाक अधिकृत कश्मीर तिरंगे के तले आ जाता। श्री शाह ने कहा कि एक तो कश्मीर का मामला यूएन में ले ही नहीं जाना चाहिए था और अगर ले भी जाया गया तो इस मामले को अनुच्छेद 51 में क्यों ले गए। उन्होने कहा कि अगर इस मसले को अनुच्छेद 35 में ले गए होते तो हमें कोई दिक्कत नहीं होती। गृह मंत्री ने अगर दो दशक बाद भी ऐसा लगेगा कि धारा 370 को हटाने का फैसला गलत है तो हम स्वीकार करेंगे कि यह हमारा और हमारी सरकार का फैसला है। श्री शाह ने  कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने यह फैसला लिया है और न ही मोदी जी इस फैसले से पीछे सकते हैं, न ही कैबिनेट और पार्टी इससे पीछे हट सकती है। उन्होंने कहा कि अहम फैसलों की जिम्मेदारी स्वीकार करनी पड़ती है।


श्री अमित शाह ने कहा कि पूरा कश्मीर और कश्मीर जाने वाले दो करोड़ पर्यटक, लाखों अमरनाथ यात्री और वैष्णो देवी के दर्शन करके आए श्रद्धालु सभी एक स्वर में कहते हैं कि कश्मीर की स्थिति अच्छी है। श्री शाह ने कहा कि कश्मीर में 40 हजार से अधिक लोग मारे गए, कई पिता अपने कंधे पर बेटे के जनाजे लेकर गए, कई लोग अपनी बेटी की डोली तक नहीं देख पाए और कई बहनों ने अपने भाई को खो दिया। संवेदनशील हृदय वाले लोग ही उनकी वेदना महसूस कर सकते हैं। गृह मंत्री  ने कहा कि 2014 में श्री नरेन्द्र मोदी जी की सरकार आने और धारा 370 समाप्त होने के बाद आज कश्मीर के युवाओं का भविष्य ब्लैक नहीं है, बल्कि स्कूल का ब्लैक बोर्ड उनका भविष्य बन गया है। उन्होंने कहा कि जो युवा पत्थर लेकर घूमते थे, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने उनके हाथों में लैपटॉप थमाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि कश्मीर में यह बदलाव हुआ है कि धारा 370 को आधार बनाकर आतंकवाद और अलगाव की बात करने वाले लोगों को अब कश्मीर की जनता अनसुना कर डेमोक्रेसी एवं डेवलपमेंट की बात करती है।


गृह मंत्री ने सदन को बताया कि उन्होंने कहा था कि धारा 370 खत्म होने के बाद कश्मीर में अलगाववाद की भावना समाप्त हो जाएगी और जब अलगाववाद की भावना समाप्त होगी तो धीरे धीरे आतंकवाद भी खत्म हो जाएगा। श्री शाह ने कहा कि विपक्ष को ऐसा लगता है कि पिछले 40 चालीस साल की उनकी गलतियां मोदी जी 4 साल में सुधार देंगे।  गृह मंत्री ने कहा कि वर्ष 2004 से 2014 तक कश्मीर में कुल 7217 आतंकवादी घटनाएं हुई थीं, लेकिन 2014 से अब तक पिछले लगभग 10 साल में सिर्फ 2197 आतंकवादी घटनाएं हुई हैं। उन्होंने कहा कि आतंकवादी घटनाओं में 70 प्रतिशत की कमी हुई है जबकि धारा 370 हटाने को अभी चार साल ही बीते हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2004 से 2014 तक कश्मीर में कुल 2829 सुरक्षा कर्मी और नागरिक मारे गए, जबकि 2014 से 2023 तक 891 सुरक्षा कर्मी और नागरिक मारे गए जो पहले की तुलना में 70 फीसदी कम है। श्री शाह ने कहा कि सुरक्षा कर्मियों की मृत्यु में भी 50 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2010 में संगठित पत्थरबाजी की 2654 घटनाएं हुई जबकि 2023 में धारा 370 हटाने के सिर्फ चार साल बाद एक भी पत्थरबाजी की घटना नहीं हुई। वर्ष 2010 में पत्थरबाजी में 112 नागरिक मारे गए थे जबकि 2023 में पत्थरबाजी की एक भी घटना नहीं हुई, इसलिए किसी की मृत्यु का सवाल ही नहीं है। वर्ष 2010 में पत्थरबाजी के कारण घाटी के 6235 नागरिक जख्मी हुए थे, लेकिन 2023 में यह आंकड़ा शून्य है। श्री शाह ने कहा कि 2010 में सीजफायर उल्लंघन की घटनाएं 70 थीं जो 2023 में सिर्फ 6 हैं। 2010 में घुसपैठ के प्रयास 489 बार हुए जबकि इस साल अब तक सिर्फ 48 हुए हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2010 में घाटी छोड़कर भागे आतंकवादियों की संख्या 18 थी, जबकि 2023 में यह संख्या 281 है।


गृह मंत्री ने कहा कि हमने सिर्फ आतंकवाद के खिलाफ आवाज नहीं उठाई है, बल्कि आतंकवाद के पूरे इकोसिस्टम को खत्म करने का काम किया है। साथ ही आतंकवाद को फाइनांस करने वालों पर भी कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार में NIA ने टेरर फाइनांस के 32 केस दर्ज किए, जबकि 2014 से पहले एक भी केस दर्ज नहीं किया गया था। स्टेट इनवेस्टिगेशन एजेंसी ने टेरर फाइनांस के 51 केस दर्ज किए जबकि पहले स्टेट इनवेस्टिगेशन एजेंसी की जरूरत ही महसूस नहीं की गई। उन्होंने कहा कि टेरर फाइनांस के मामलों में अब तक 229 गिरफ़्तारी हुई, 150 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति जब्त की गई, 57 प्रॉपर्टी सीज की गईं है। इसके अलावा NIA ने 134 बैंक खातों में लगभग 100 करोड़ रुपए से अधिक की रकम को फ्रीज करने का काम किया है।


श्री अमित शाह ने कहा कि वर्ष 2014 से पहले कश्मीर में आतंकवादियों के जनाजों में 25-25 हजार लोगों की भीड़ जमा होती थी लेकिन धारा 370 खत्म होने के बाद ऐसे दृश्य दिखना बंद हो गए। उन्होंने कहा कि यह इसलिए संभव हुआ है क्योंकि हमने निर्णय किया कि किसी भी आतंकवादी के मारे जाने के बाद संपूर्ण धार्मिक रीति-रिवाज के साथ घटनास्थल पर ही उसे दफना दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पत्थरबाजी की घटनाएं भी बंद हुई क्योंकि सरकार ने तय किया है कि अगर किसी अभ्यर्थी के परिवार में पथरबाजी का केस है तो उसे सरकारी नौकरी नहीं दी जाएगी। सरकार ने तय किया है कि अगर किसी के परिवार का कोई सदस्य पाकिस्तान में बैठकर भारत में आतंकवाद को प्रोत्साहन देता है तो उसे सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी। गृह मंत्री ने यह भी कहा कि टेलीफोन रिकॉर्ड के आधार पर अगर साबित होता है कि किसी के परिवार का कोई व्यक्ति आतंकवाद को बढ़ावा देने में लिप्त है तो उसे नौकरी से बर्खास्त करने के सर्विस रूल्स बनाए गए हैं।


गृह मंत्री ने कहा कि जीरो टेरर प्लान और कंप्लीट एरिया डॉमिनेशन के माध्यम से पूरे आतंकवाद प्रभावित क्षेत्र को सुरक्षित करने का काम किया गया है। उन्होंने कहा कि जेल पहले अड्डे थे, लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की सरकार ने जेलों में जैमर लगाकर सख्ती करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि कश्मीर में 105 करोड़ रुपए की लागत से आतंकवादियों के लिए एक जेल बनाई जा रही है, जिसकी सुरक्षा कोई भेद नहीं पाएगा। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के प्रति सहानुभूति रखने वाले बार काउंसिल के लोगों को भी संदेश दे दिया गया है और रोजगार, पासपोर्ट एवं सरकारी ठेकों के लिए हमने ढेर सारे कदम उठाए हैं। 


श्री अमित शाह ने कहा कि हमारी सरकार के समय में भी आतंकवादी हमले हुए, उरी और पुलवामा में आतंकवादी घटनाएं हुईं, लेकिन हमने घर में घुसकर जवाब देने का काम किया। आतंकवादियों के लिए हमारे मन में कोई संवेदना नहीं है। आतंकवादी अगर हथियार डाल दें और मुख्यधारा में शामिल हो जाएं तो उनका स्वागत है। उन्होने कहा कि नॉर्थ ईस्ट में कई लोग हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटे हैं। गृह मंत्री ने कहा कि सरकार ने  कश्मीर के युवाओं के लिए कई कदम उठाए हैं। धारा 370 और 35 ए कश्मीर के लोगों के साथ तो अन्याय करती ही थी, देश के आत्मसम्मान को भी ठेस पहुंचाती थी। श्री शाह ने कहा कि श्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने देश में दो विधान, दो निशान और दो प्रधान के मसले पर सवाल उठाते हुए मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने आंदोलन किया और उनकी संदेहास्पद स्थिति में मौत हो गई। श्री शाह ने कहा कि आज उन्हे खुशी है कि कश्मीर के लिए बलिदान देने वाले फौजी से लेकर श्यामा प्रसाद मुखर्जी तक हर व्यक्ति की आत्मा इस देश से दो प्रधान, दो विधान और दो निशान खत्म होने पर संतोष की सांस ले रही होगी।


गृह मंत्री ने कहा कि धारा 370 पर आज सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आया है और130 करोड़ जनता की ओर से वे इस फैसले का स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि आज एक संविधान, एक राष्‍ट्रीय ध्‍वज और एक प्रधानमंत्री बन चुका है और अब श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सपना साकार हो चुका है। श्री शाह ने कहा कि पहले कश्मीर में दो राजधानी और दो दरबार थे और सालाना 200 करोड़ रुपए का खर्च होता था जबकि अब एक केंद्रीय कानून है जो पूरे देश की तरह कश्मीर पर भी लागू होता है। उन्होने कहा कि कश्मीरी, डोगरी और हिन्दी को मान्यता देने का काम पहली बार प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र  मोदी जी ने किया है। 35 ए के तहत कश्मीर की महिलाओं को न्याय देने, शिक्षा या नौकरी में रिजर्वेशन देने, पहली बार एसटी समुदाय को विधानसभा में आरक्षण देने, कश्मीर में शिक्षा का अधिकार कानून लागू करने, भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्वसन में उचित मुआवजा देने का कानून, वन अधिकार कानून लागू कराने, एससी—एसटी उत्पीड़न रोकथाम कानून लागू करने और व्हिसलब्लोअर संरक्षण कानून लागू कराने का काम पहली बार प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र  मोदी जी ने किया है। उन्होंने कहा कि लाल चौक पर 26 जनवरी को घर—घर तिरंगा फहराया गया। 30 साल से कश्मीर में थिएटर नहीं चलते थे लेकिन अब तीन थिएटर चालू हो चुके हैं। पिछले तीन सालों में कश्मीर में 100 फिल्मों की शूटिंग हुई है। उन्होंने कहा कि देश की जनता अब समझ गई है कि कश्मीर के सवाल के मूल में जवाहरलाल नेहरू जी की गलतियां थीं।    


श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने लाल किले की प्राचीर से इस देश को वादा किया था कि कश्मीर के युवाओं को हाथ में कभी बंदूक और पत्थर नहीं लेने पड़ेंगे। उनके हाथों में लैपटॉप और किताबें होंगी और अब आतंकवाद मुक्त नया कश्मीर बनने की शुरुआत हो चुकी है। उन्होने कहा कि जब भारत विकसित राष्ट्र बनेगा तो कश्मीर देश के सभी राज्यों के समकक्ष होगा और दुनिया भर के यात्री कश्मीर आएंगे।

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